चौबीस: भगवान शिव के गणों द्वारा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस (भाग-2)
दक्ष द्वारा अपने पति शिवजी के अपमान से कुपित होकर सती ने दक्ष की यज्ञ-सभा में ही योगाग्नि द्वारा आत्मदाह कर लिया। यह एक अत्यंत हृदयविदारक दृश्य था जिसे देख कर सारे लोकों में हाहाकार मच गया। यज्ञ में उपस्थित देवता और अन्य सभी अतिथि-गण दक्ष को धिक्कारने लगे - अहो! यह दक्ष कितना निष्ठुर है! सती-जैसी इसकी मनस्विनी पुत्री हर तरह से स्नेह और सम्मान पाने योग्य थी। किन्तु, जब वह प्राण त्यागने जा रही थी, इसने उसे रोका तक नहीं। दक्ष ने भारी अपराध किया है। इससे संसार में इसकी बड़ी अपकीर्ति होगी। सती ने शिवजी के गणों को रोक रखा था, किन्तु, उनके देहत्याग करते ही गणों के क्रोध का बाँध टूट गया। वे दक्ष को मारने दौड़ पड़े। उनका प्रबल वेग देखकर भृगु मुनि ने दक्ष की रक्षा के लिए यज्ञ की अग्नि से ही ऋभु नामक हजारों देवता उत्पन्न कर दिए। इन शक्तिशाली देवताओं ने शिवजी के गणों पर आक्रमण कर उन्हें भगा डाला। उधर शिवजी को जब देवर्षि नारद द्वारा सती के प्राण-त्याग की सूचना मिली तो उनके क्रोध की सीमा नहीं रही। उन्होंने तत्काल अपनी जटा के एक केश से वीरभद्र नामक एक विकराल पुरुष की सृष्टि की और उसे आदेश दिया क...