पंद्रह: परीक्षित द्वारा सृष्टि-विषयक प्रश्न

परीक्षित ने शुकदेवजी से जिज्ञासा की - हे पवित्र और सर्वज्ञ मुनिवर! भगवान इस सृष्टि की रचना, रक्षा और संहार कैसे करते हैं?

शुकदेवजी ने उत्तर दिया  - हे राजन! एक बार नारदजी ने अपने पिता ब्रह्माजी से यही प्रश्न किया था। ब्रह्माजी ने तब यह उत्तर दिया था - पुत्र नारद! ऊपर से यही प्रतीत होता है कि मैं इस सृष्टि की रचना करता हूँ। किंतु, मैं भी स्वतंत्र नहीं हूँ। मैं उन नारायण के अधीन हूँ जो सबके स्वामी हैं। उनका न तो आदि है न ही अंत। वे शाश्वत, शांत, अभय और परम ज्ञान स्वरूप हैं। वे त्रिगुणातीत और मायातीत हैं। उन्होंने केवल संसार की सृष्टि, रक्षा और संहार के लिए क्रमशः रजोगुण, सतोगुण और तमोगुण को स्वीकार किया है। उन्हीं की प्रेरणा से मैं जगत की सृष्टि करता हूँ। वे स्वयं विष्णु रूप में इसका पालन करते हैं। और, उन्हीं के अधीन  होकर शिवजी इसका विनाश करते हैं।


श्याम चतुर्वेदी 

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